• ऊर्जा व अवसंरचना विभाग के संक्रियात्मक उद्देश्य इस प्रकार हैं

    • कम उर्जा से अति उर्जा की आवश्यकता वाले क्षेत्रों के भागों पर विचार कर कार्यनीति बनाना एवं उनकी ऊर्जा पूर्ति के लिए स्थानीय संसाधनों के नवप्रवर्तित प्रयोग द्वारा माँग कार्यक्षेत्र पर विचार करना |
    • ऊर्जा की अवश्यकता समुचित पूर्ति को ध्यान में रखकर उत्पाद/पैमाना/संदर्भ से मेल खाते उपकरण/पद्धतियाँ/ऊर्जा का विचार करते हुए उत्पाद/प्रक्रियाओं का स्वरूप बदलना |
    • उचित मानव-मशीन पद्धतियो के ढाँचे द्वारा रोजगार को निश्चित करने के लिए गुणवत्ता व उत्पादकता को नजरअंदाज़ किए बिना वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए समूहिक प्रौद्योगिकी विकास एवं निर्माण करना |
    • भवन निर्माण के भागों, मजबूत संरचना, प्रतिस्थापना/परिवहन व पैकिंग को कम करने क साथ ही कचरे के पुनः चक्रीकरण को बढ़ावा देकर सामुदायिक उपभोग के क्षेत्र में अन्न, कपड़ा व निवास के लिए नवीनतम कल्पनाओं को शीघ्र कार्यान्वित करना, संपोषित जीवन शैली हेतु मदद करना तथा लागत व्यय में कमी करना |
    • शिल्पकारों, महिलाओं, कमजोर क्षेत्रों, विकलांगों आदि द्वारा प्रयोग में आने वाले उपकरणों/पद्धतियाँ को नवीनतम ऊर्जा आधार प्रदान कर महत्व को बढ़ावा देना, समानता/ मनुष्य बल में वृद्धि करना |
    • ऊर्जा के उच्चस्तरीय आयाम जैसे उर्जा संरक्षण, उर्जा लेखा एवं विकेन्द्रित उर्जा कार्यनीतियों को ध्यान में रखते हुए पंचायत समूहों के लिए व्यवहार्य कार्य योजना बनाना एवं इसके विकास मे मदद करना.|
  • अवसंरचना

    ऊर्जा एवं अवसंरचना विभाग के अंतर्गत इनका समावेश है

    • आधुनिक अभियांत्रिकी कार्य केंद्र
    • अभियांत्रिकी रचना शाला
    • नवप्रवर्तन केंद्र
    • नवप्रवर्तन उध्योग केंद्र तथा

    ऊर्जा प्रयोगशाला जिसके अंतर्गत इंजन परीक्षण साज-सज्जा , गैसीकरण यंत्र, बायोगैस सयंत्र , ईंधन प्रयोगशाला , ऊर्जा का लेखा परीक्षण विन्यास , ब्रिक्वेटिंग तकनीक प्रयोगशाला , एल.ई.डी.(LED) उत्पाद प्रयोगशाला, हवामान केन्द्र आदि का समावेश है |

  • गतिविधियों के गंतव्य

    ऊर्जा एवं अवसंरचना विभाग की गतिविधियों के निम्नांकित तीन गंतव्य हैं :-

    • संपोषित ऊर्जा प्रौद्योगिकी के विकल्पों को पहचानना |

      एमगिरि की परियोजना के समय IIT दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में निम्नांकित कार्यविधि के क्षेत्र में पहल की गई थी :-

      • बायोगैस सफाई, पैकेजिंग तथा इंजिनों में प्रयोग |
      • लघु पनबिजली आधारित कार्य स्टेशन
      • समुदाय के मानदंड पर ब्रीक्वेटिंग पद्धतियाँ
      • कुम्हार आंवा (भट्टा) आदि में ऊर्जा संरक्षण
    • अवसंरचना आधारित क्षेत्र, जैसेः-भंडार पद्धति, जलपुनर्चक्रीकरण, आवास, कचरा-पूनर्चक्रीकरण, परिवहन एवं संप्रेषण में आवश्यक तत्वों को ध्यान मे लेते हुए |
    • सूक्ष्म एवं लघु उद्यमो के क्षेत्र के लिए ऊर्जा पद्धतियों के नमूने तैयार करना |
  • नवीन अंतर्भावितता एवं उपलब्धियाँ

    सौर चरखा :-
    एमगिरि ने मई 2008 में एक व्यवहार्य सौर चरखे का प्रवर्तन किया है | वर्धा में एक छोटे सौर चरखे पर आधारित कपास उत्पादक समुहो द्वारा प्रयोग से यह सिद्ध हुआ है की कारीगरों की प्रतिदिन की कमाई क्षमता को दुगुना करने के साथ ही वस्त्र की कीमत को बहुत कम किया जा सकता है | ऐसी आशा है की इस संपोषक प्रौदोगिकी की प्रेरणा से राष्ट्रपिता द्वारा सन 1929 में वैज्ञानिको को दिए गए सचेतक आह्वान का उत्तर हो सकता है |

  • लच्छों को रँगने की मशीन

    लच्छों को रँगने के लिए एक मशीन का निर्माण किया गया है जिसमें रंग देने वाले कारीगरों को अत्याधिक मेहनत, अपूर्णता(सदोष) तथा कम उत्पादकता से मुक्ति दिलाने की क्षमता है | इस बैच प्रोसेसिंग मशीन द्वारा प्रति बैच मे 5 किलोग्राम सूत को रँगना संभव होता है तथा साथ ही आवश्यकता पड़ने पर रँगे हुए सूत को सुखाने की भी नवीनतम व्यवस्था है |

  • पैकेजिंग मशीन

    मिर्ची, अदरक, मसाले आदि सूखे उत्पाद को पैकेज करने हेतु नवप्रवर्तन कक्ष द्वारा वहन उचित कीमत की एक पैकेजिंग मशीन विकसित की है | इसकी कीमत पारंपरिक मशीन की तुलना में एक तिहाई है | सुक्ष्म वर्ग के उद्योगी भी इसे खरीदने में समर्थ हो सकते हैं | इस प्रकार यह मशीन उन लोगों के लिए आधुनिक विपणन प्रक्रिया में एक उपयोगी उपकरण सिद्ध हो सकती है | एमगिरि द्वारा प्रवर्तित मानव-मशीन वैचारिक पद्धति की पहल से कम लागत वाले उत्पाद निर्मित किए गए है |

  • सौर कुम्हार चाक

    इस विभाग द्वारा एक सौर कुम्हार चाक विकसित किया गया है जिसकी कीमत करीब 25,000 रूपये है | यह सौर शक्ति की कम हॉर्सपावर की मोटर पर चलता है |

  • शक्तिउपकरण

    शिल्पकारों की गुणवत्ता व उत्पादकता की दृष्टि से मदद करने हेतु इस विभाग ने सौर शक्ति उपकरण विकसित किए हैं |

  • वैश्विक सहयोग

    एमगिरि ने दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय पुर्ननवीनीकरण शक्ति सम्मेलन (2010) में भाग लिया तथा इसके द्वारा प्रदर्शित अनेक प्रमुख उपकरणों को UNDP,GTZ,OAU ( अफ्रिका संघ के संगठन) REEEP (ऑस्ट्रेलिया) तथा स्वीटजरलैंड, जर्मनी आदि की एजंसियों से सहयोग प्राप्त हुआ |