संक्रियात्मक उद्देश्य :-

1) विज्ञान व प्रौद्योगिकी सहायता से तथा वैज्ञानिकों ,तकनीकी और प्रबंधन विशेषज्ञों के साथ निकटतम समंवय साध्य करते हुए, ग्रामीण शिल्पकारों के कौशल,सॄजनात्मकता एवं उत्पाद में वृद्धि करना तथा उनके उत्पादों का मूल्यवर्धन व उच्च गुणवत्ता के स्तर को कायम रखना | ताकि सॄजनात्मकता नवीनतम , गुणवत्ता के प्रति सतर्कता कायम रहे तथा उत्पाद की जानकारी बाजार में बिकने योग्य बनाया जा सकें ।
2) नवीन उत्पादों एवं मशीनों की संरचना हेतु आदर्श नमूने का निर्माण व विकास के लिए पूर्ण सहयता करना तथा उन्हें उद्यमी बनाना |
3) ग्रामीण शिल्पकला क्षेत्र में आधुनिक वैज्ञानिक प्रशिक्षण के द्वारा शिक्षित ग्रामीण युवकों को नए उद्यम के अवसर प्रदान करना तथा उन्हें उधमी बनाना |

अनुसंधान एवं विकास संबंधी गतिविधियाँ :-

1) विभिन्न कारीगर की कार्य प्रणाली की अनुकूलता हेतु औज़ार एवं मशीनों व यंत्रों को विकसित करना |
2) विभिन्न शिल्पकला के लिए गुणवत्ता विकास तथा गुणवत्ता मार्गदर्शन पद्धतियों का निर्माण करना |
3) एमगिरि में विकसित तकनीक द्वारा प्रशिक्षण की आधुनिक पद्धतियों के साथ उसकी कालावधि तथा तकनीकी/व्ययस्था के संपोषित नमूने को कारीगरों तक पहुँचाना एवं उनका विस्तार करना |

परामर्श सेवाएँ :-

उत्पाद के उत्कृष्ट नमूने व उच्च स्तर की तकनीकों के विकास के आधार पर एमगिरि सेवाएँ प्रदान करता है ताकि शिल्पकला के उत्पाद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें |

प्रशिक्षण कार्यक्रम :-

मिट्टी, धातु, लकड़ी, बाँस, वस्त्र, चर्म इत्यादि कलाकृतियों के लिए नवीनतम प्रारूप एवं विकसित तकनीकों हेतु एमगिरि के शिल्पकला एवं अभियांत्रिकी विभाग में प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं |

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जालतंत्र एवं प्रोत्साहनपरक गतिविधियाँ
शिल्पकारों व हस्तकला से संबंधित संस्थानों का जालतंत्र

* संपूर्ण बाँस केंद्र -लबाड़, सुरुचि
* यंत्र विद्यालय-बरदोली, ग्रामोद्योग संघ – भद्रावती
* कला आश्रम-आदिलाबाद
* राष्ट्रीय कारीगर पंचायत-मगन संग्रहालय वर्धा
* कास्य काला उत्थान समिति -शहारणपुर
* गाँधी आश्रम -शहारणपुर
* शांति साधना आश्रम -गुवाहाटी, आसाम
* अंतर्राष्ट्रीय बाँस एवं राटेण(इनबार)
* विकास आयुक्त(हस्तकला) वस्त्रोद्योग मंत्रालय, भारत सरकार

जिला ग्रामीण विकास अभियंत्रणा, वर्धा
नवप्रवर्तन ग्रामीण शिल्प उत्पादों के विकास एवं चिन्हित करने हेतु शिल्पकारों व प्रोत्साहक एजेंसियों के लिए ‘एमगिरि वेब ‘ आधारित नमूने की मदद हेतु कार्यक्रम भी आयोजित करता है |

एमगिरि में उपलब्ध कार्यशाला सुविधा :-

1) विभिन्न शिल्पकलाओं हेतु अभिप्राय व मूलरूप की रचना व विकास के लिए सुसज्जित कार्यशालाएँ है |
2) संप्रेषण प्रशिक्षण हेतु सुसज्जित डिजिटल डिजाइन स्टुडियो
3) तथा चाक्षुक प्रयोगशाला है, जिसमे भारत के विभिन्न भागों से आए प्रशिक्षणार्थी अपने कौशल व ज्ञान का आदान-प्रदान कर सकें (एक अनुपम शिल्पकर संकुल)|

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सामयिक विकास कार्य

1) एमगिरि के आगामी विकास में गति परिवर्तनीय लौह घेरा(रिम) तथा टायर कुंभार चाक |
2) विभिन्न हस्तकलाओं के लिए बिजली पर चलनेवाले उपकरण/औज़ार |
4) मिट्टी से बनाए जानेवाले विविध उत्पाद के लिए नैसर्गिक रंग का विकास |
5) एमगिरि में विकसित नैसर्गिक रंगवाले मिट्टी से बनाये जानेवाले आभूषण |

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एमगिरि के उत्तर-पूर्व प्रोस्ताहन:-

1) बेरोजगार युवकों के लिए अवसर निर्माण करना तथा
2) मानव संसाधन विकास (HRD) के आवश्यक मार्गदर्शन में रचनात्मक कार्यक्रम के पैकेज के एक भाग के रूप में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर आधारित नवीनतम उद्योगों का मार्गदर्शन करना |
3) परंपरागत हस्तकलाकारों तथा कारीगरों को समर्थ बनाने हेतु उनके कौशल में सुधार करना तथा वैज्ञानिकों, तकनीकी एवं प्रबंधन विशेषज्ञों के साथ निकटतम समन्वय साध्य करना ताकि सर्जनात्मकता, नवीनतम, गुणवत्ता के प्रति सतर्कता कायम रहे तथा उत्पाद को त्वरित बाजार उपलब्ध करवाया जा सके ।
4) स्वदेशी प्रौद्योगिकी पैकेज जो वाणिज्यिक दृष्टि से व्यवहार्य है, परंपरागत तौर पर उनका आधुनिक पद्धतियों से समाकलन करते हुए उन्हें विकसित करना तथा उनका प्रचार-प्रसार करना ताकि ग्रामीण उद्यमशीलता को संपोषिता के आधार पर अधिकाधिक प्रोत्साहन मिले |
5) एमगिरि अनेक परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है जिससे उत्तर-पूर्व प्रदेश के परंपरागत कला-कौशल एवं बुद्धिमत्ता की संपूर्ण वाणिज्यिक अंत:शक्ति को समझा जा सके | इस परिप्रेक्ष्य में एमगिरि संस्थान आपसी सहयोग से कार्य करने का एक विशेष जालतंत्र( नेटवर्क) प्रारंभ कर रहा है ताकि परंपरागत हस्तकला की पुर्नसंरचना को लघुउद्दोगों के जालतंत्र में समाहित किया जा सके | इसी प्रयास में यह देश की सभी राज्य सरकारों के साथ भी कार्य करेगा |

निम्नांकित कुछ नवीन उदाहरण है :-

एमगिरि की उत्तर-पूर्व में नवीन अंतर्भावितता :-

धातु एवं पीतल के कारीगरों का समूह, सरतेबारी, सरतेबारी में विकसित प्ररूपी उत्पाद

जिला – बारपेटा आसाम

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एमगिरि की उत्तर-पूर्व में नवीन अंतर्भावितता -
बेंत एवं बाँस के कारीगरों का समूह, त्रिबक, KVIC स्फूर्ति, नरसिंगर, अगरताला, त्रिपुरा, में विकसित प्ररूपी उत्पाद

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जिला – चांदेल,
मणिपुर – लकड़ी काम के कारीगरों का समहू, मोरे, मणिपुर में विकसित प्ररूपी उत्पाद

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